"धैर्य रखना, निराश मत होना कभी, क्योंकि जिसने तुमको लिखा है, वो ब्रह्मांड का सबसे बड़ा लेखक है!" – ओशो

"जीवन एक पुस्तक है, लेकिन इसे पढ़ने की जल्दी मत करो। हर पृष्ठ का अपना समय है, हर अध्याय का अपना अर्थ है।"

ओशो कहते हैं, "तुम्हारी कहानी अभी पूरी नहीं हुई है।"

लेकिन समस्या यह है कि हम कहानी का अंत जानने के लिए अधीर हो जाते हैं। हम चाहते हैं कि हर चीज़ अभी, इसी क्षण पूरी हो जाए। और जब हमारी इच्छाएँ पूरी नहीं होतीं, तो हम निराश हो जाते हैं।

लेकिन अगर जीवन को कोई लिख रहा है, तो वह लेखक साधारण नहीं हो सकता। वह ब्रह्मांड का सबसे बड़ा लेखक है। उसने यह सारा खेल बनाया है, उसने तुम्हें भी लिखा है, और वह गलत नहीं लिख सकता।

तो घबराने की क्या जरूरत है?

चलो, इसे एक कहानी के ज़रिए समझते हैं।

1. एक कहानी: राजा और मूर्ख साधु

एक बार की बात है, एक राजा अपने जीवन से बहुत निराश था। उसके पास सब कुछ था—धन, ऐश्वर्य, शक्ति—लेकिन फिर भी वह उदास था। उसे लगता था कि उसकी समस्याएँ कभी खत्म नहीं होंगी।

एक दिन, एक साधु उसके दरबार में आया। यह साधु थोड़ा अजीब था—कभी ज़ोर से हँसता, कभी रोने लगता, कभी नाचने लगता। राजा ने उससे पूछा, "तुम्हारी यह अजीब हरकतें क्यों हैं?"

साधु ने कहा, "मैं जीवन को स्वीकार करता हूँ। जब जीवन हँसाता है, तो मैं हँसता हूँ। जब रुलाता है, तो रोता हूँ। जब नचाता है, तो नाचता हूँ। लेकिन मैं कभी परेशान नहीं होता, क्योंकि मैंने जीवन पर भरोसा करना सीख लिया है।"

राजा को यह समझ नहीं आया। उसने कहा, "लेकिन मैं तो राजा हूँ, मेरे पास सबकुछ है, फिर भी मैं सुखी क्यों नहीं हूँ?"

साधु हँसा और बोला, "क्योंकि तुम कहानी का अंत अभी जानना चाहते हो। तुम अधीर हो।"

फिर साधु ने अपनी अंगूठी उतारी और राजा को दी। उस पर लिखा था:  

"यह समय भी बीत जाएगा।"

राजा ने पूछा, "इसका क्या अर्थ है?"

साधु ने कहा, "जब तुम दुखी हो, तो यह पढ़ना—तुम्हें अहसास होगा कि यह दुख स्थायी नहीं है। और जब तुम बहुत खुश हो, तब भी इसे पढ़ना—ताकि तुम समझ सको कि यह भी स्थायी नहीं है।"

राजा को पहली बार समझ आया कि जीवन में सब कुछ अस्थायी है। दुख भी आएगा, लेकिन चला जाएगा। सुख भी आएगा, लेकिन टिकेगा नहीं।

2. धैर्य का असली अर्थ क्या है?

ओशो कहते हैं, "धैर्य का मतलब यह नहीं कि तुम कुछ भी न करो। धैर्य का अर्थ यह है कि तुम जो भी कर रहे हो, उसे पूर्ण रूप से करो—लेकिन परिणाम की चिंता मत करो।"

आजकल के लोग हर चीज़ तुरंत चाहते हैं। "इंस्टेंट" ज़माना है—इंस्टेंट नूडल्स, इंस्टेंट कॉफी, इंस्टेंट सफलता!  

लेकिन जीवन में कुछ भी "इंस्टेंट" नहीं होता।

- कोई बीज बोते ही वृक्ष नहीं बन जाता।

- कोई बच्चा पैदा होते ही जवान नहीं हो जाता।

- कोई प्रेम करते ही आत्मा तक नहीं जुड़ जाता।

धैर्य का अर्थ है—"समय को उसका काम करने दो।"

यदि तुम किसी चीज़ को सही समय से पहले पाने की कोशिश करोगे, तो वह अधूरी मिलेगी।

तुम्हारा समय आएगा, लेकिन तब आएगा जब तुम तैयार होगे।

3. निराशा क्यों आती है?

निराशा का कारण हमारी इच्छाएँ हैं।

हम चाहते हैं कि जीवन हमारे अनुसार चले। हम चाहते हैं कि हमारे रास्ते में कोई कठिनाई न आए।

लेकिन क्या तुमने कभी सोचा है कि जीवन की सबसे सुंदर कहानियाँ उन्हीं लोगों की होती हैं जिन्होंने कठिनाइयाँ झेली हैं?

- अगर अर्जुन को महाभारत का युद्ध न लड़ना पड़ता, तो वह इतिहास में अमर नहीं होता।  

- अगर गौतम बुद्ध को महल छोड़कर जंगल में भटकना न पड़ता, तो वे बुद्ध नहीं बनते।  

- अगर मीराबाई को संघर्ष न करना पड़ता, तो उनकी भक्ति इतनी प्रखर नहीं होती।

जितनी बड़ी कठिनाई, उतना बड़ा रूपांतरण।

तो अगर जीवन में कोई संघर्ष है, तो यह मत सोचो कि कुछ गलत हो रहा है।

बल्कि यह सोचो कि ब्रह्मांड तुम्हें एक बड़ी कहानी में ढाल रहा है।

4. ब्रह्मांड का सबसे बड़ा लेखक कौन है?

तुमने कभी सोचा है कि तुम्हारा जन्म क्यों हुआ?  

तुम यहाँ क्यों हो?

ओशो कहते हैं, "तुम यहाँ संयोग से नहीं आए हो। तुम्हारे होने के पीछे कोई गहरी योजना है।"

लेकिन तुम हमेशा जल्दी में रहते हो।

तुम यह जानने के लिए परेशान हो जाते हो कि "मेरा भविष्य क्या होगा?"

अगर कोई किताब तुम्हें दी जाए, और कहा जाए कि इसे पूरा पढ़ो, लेकिन तुम पहले ही आखिरी पेज पर चले जाओ, तो क्या तुम कहानी का मज़ा ले पाओगे?

नहीं!

जीवन भी एक किताब है। इसे धीरे-धीरे पढ़ो।

हर दिन एक नया पृष्ठ है, हर साल एक नया अध्याय।

5. जब जीवन कठिन हो, तो क्या करें?

(1) जीवन को लेखक के हाथ में छोड़ दो

अगर ब्रह्मांड का लेखक तुम्हारी कहानी लिख रहा है, तो वह सही ही लिखेगा।

(2) जो हो रहा है, उसे स्वीकार करो

जो कुछ भी तुम्हारे जीवन में हो रहा है, वह तुम्हारे लिए सही है—भले ही अभी समझ न आए।

(3) आज में जीना सीखो

कल के बारे में मत सोचो। अगर आज को पूरी तरह जी लिया, तो कल अपने-आप अच्छा हो जाएगा।

(4) हँसना मत भूलो

ओशो कहते हैं, "जीवन में हास्य होना जरूरी है। जो व्यक्ति हँस सकता है, वह कभी गंभीर नहीं हो सकता, और जो गंभीर नहीं है, वही जीवन को समझ सकता है।"

6. निष्कर्ष: कहानी अभी खत्म नहीं हुई है!

ओशो कहते हैं, "हर घटना तुम्हारे लिए एक नई संभावना लाती है। लेकिन तुम उसे समस्या समझ लेते हो।"

तो अगर जीवन कठिन है, तो यह मत सोचो कि कहानी खत्म हो गई है।

"जिसने तुम्हें लिखा है, वह ब्रह्मांड का सबसे बड़ा लेखक है। वह गलत नहीं लिख सकता।"

बस धैर्य रखो, कहानी का अगला अध्याय अभी लिखा जा रहा है!

अब फैसला तुम्हारा है—तुम इसे पढ़कर सिर्फ सोचोगे, या इसे अपने जीवन में अपनाओगे?"

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